आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से सब कुछ बदलने वाला है, क्या मशीन दुनिया पर राज करेगी!

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हॉलीवुड की दिग्गज सुपरमॉडल गीगी हदीदी ने ट्विटर छोड़ दिया है उन्होंने कहा कि एलन मस्क द्वारा ट्विटर खरीदने के बाद यह अब किसी के लिए सुरक्षित स्थान नहीं है।

गीगी हदीद के अलावा भी कई स्टार्स और हस्तियों ने इन दिनों में ट्विटर को अलविदा कहा है। अब सवाल यह है कि ट्विटर की लोकप्रियता जितनी थी या अब जो है वह घट रही या बढ़ रही है। कई सेलिब्रिटी ट्विटर को छोड़ रहे हैं।

एक तरह की कॉन्सपेरेंसि

याद हो तो पहले ऑरकुट हुआ करता था जिसकी प्रसिद्धि चरम पर थी। उसके बाद फेसबुक ट्विटर आया। दरअसल देश काल पात्र बदलता है तो उसका प्रभाव हर क्षेत्र पर पड़ता है। आज के वक्त में सोशल मीडिया लोगों के बात रखने का शसक्त माध्यम है।

जिस तरह से व्यवस्था व इंटरनेट द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले माध्यम को रिफाईन किया जा रहा है वह एक तरह से कॉन्सपेरेंसि ही है। मतलब इसके माध्यम से लोगों को संचालित करना! चन्द लोग आपके हमारे मूल्य और स्पीच को तय करेंगे।

लोग अपने वोट का महत्व नही समझते पर जब सोशल प्लेटफॉर्म पर आते हैं तो घचपेलू बन जाते हैं और सारी मन की भड़ास निकाल देते हैं। बस इन्तेजार कीजिये यहां भी आपको तौला और मौला जाएगा और कई पाबंदियां लगाई जाएगी शुरुआत कम्युनिटी स्टैंडर्ड के नाम से समझा जा सकता है जैसे कि आजकल फेसबुक ट्विटर वैगरह पर कोई पोस्ट करते हैं और जब उसके खांके में फिट नही बैठता तो कम्युनिटी स्टैंडर्ड का हवाला दे कर उस पोस्ट वीडियो वैगरह को डिलीट या ब्लॉक कर दिया जाता है और कभी-कभी तो अकाउंट तक को सस्पेंड कर दिया जाता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है

यह कोई वहां बैठा कर्मचारी नही करता बल्कि बोट्स करते हैं। दुनिया में करोड़ों अकाउंट है तो सबके किये गये पोस्ट पर नजर नही रखा जा सकता अगर नजर रखनी है तो उसी हिसाब से कर्मचारी रखने होंगे। यह सब आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस के द्वारा ही संभव है।

आखिर यह AI अर्थात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या चीज है यह जान लेते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक जहां दुनिया के लिए नए आयाम स्थापित कर सकती है तो वहीं इससे दुनिया में आर्थिक असमानताएं और बेरोज़गारी जैसी त्रासदियां भी बढ़ने‌ वाली हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कम्यूटर साइंस की शाखा है जो जिसके तहत मशीनों को सोचने-समझने की क्षमता विकसित की जाती है। आसान भाषा में समझें तो इस तकनीक से लैस मशीनों के पास अपना दिमाग होता है जिसके आधार पर यह निर्णय ले पाती हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) यानी कृत्रिम बुद्धिमता यह ऐसी तकनीक है जो समझ सकती है कि इंसान कब, क्या चाहता है और उसे वही सुविधा देती है।

शुरुआत हो चुकी है

कल को अस्पतालों में डॉक्टर्स के बदले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से इलाज हुआ करेगा, स्कूलों और कॉलेजों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पढ़ाई हुआ करेगी। चिकित्सा के क्षेत्र में इसकी शुरुआत भी हो चुकी है Mfine जैसी कम्पनियां अपने एप्लिकेशन के माध्यम से घर बैठे मरीज का ईलाज तक कर रही हैं।

बस एप्लिकेशन पर अपॉइंटमेंट लेना होता है और कुछ ही समय में चैट बोट आपके समस्या का समाधान लेकर हाजिर। यह सारी चीजें कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के माध्यम से पहले ही फीड कर दिया गया है। अर्थात आर्टिफिशियल इंटलिजेंश लैस है।

यहां कोई डॉक्टर नही कोई कर्मचारी नही। गूगल वॉइस सबसे इसका सबसे सटीक उदहारण है। हम वॉइस के माध्यम से उससे कुछ भी सवाल करते हैं तो गूगल बोट का जवाब हाजिर हो जाता है। एक उदहारण यह भी है कि कई वेबसाईट और एप्लिकेशन भी उपलब्ध हैं कि बस आप हेडिंग शीर्षक दो वह आपके लिए कविता लेख आर्टिकल लेकर हाजिर हो जाएगा। इसमें आपकी हमारी बुद्धिमता सीमित हो जाएगी। हम इस सिस्टम के गुलाम ही तो बन रहे हैं।

बिना ड्राइवर के गाड़ियां, कैब, ट्रेनें चलेंगी, ड्रोन से होम डिलीवरियां होगी। इंसान अपनी ही ईजाद की हुई तकनीक के हाथों ग़ुलाम होकर बर्बाद होने वाला है।

मानवीय बुद्धि से कई कदम आगे

‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ‘( AI) के सह- संस्थापक और ‘ टेस्ला ‘ सीओ एलन मस्क ने हाल ही में कहा भी था कि सन 2025 तक AI मानवीय बुद्धि से कई कदम आगे निकल सकती है। अगर यह दावा सही साबित होता है तो क्या दुनिया ‘ए आई ‘ यानी कृत्रिम बुद्धि के मालिक की गुलाम हो जायेगी? यह यक्ष प्रश्न है।

आगे क्या होगा यह भविष्य के गर्भ में है। किंतु धुंधली ही सही पर अनुमान तो लगाया ही जा सकता है। अच्छा होगा भविष्य या बुरा कहना कठिन नही है। 5G के आने से बहुत कुछ बदलने वाला है। इसकी शुरुआत हो चुकी है।

आपके औकात का नाप लिया जाएगा। अगर आप उनके सीमा में फिट बैठते हैं तो आपको स्वीकारता मिलेगी। लॉजिक यह है कि उन्हें पता है कि एक परिवार चलाने के लिए दाना पानी चाहिए और आप हर चीज से कॉम्प्रमाईज कर उनके चरण धोया पानी पीने को तैयार रहेंगे।

आपके सामने कोई ऑप्शन ही नही रहेगा ना चाहते हुए भी आपको दिए गए विकल्प को ही चुनना होगा। मशीनें राज करेंगी। यह सवाल कल जो उठता था कि क्या मशीनी युग आयेगा? आज उस सवाल का जवाब मिल रहा है। यह तो महज शुरुआत है देश में ही देख लीजिए आपकी कौन सुन रहा? जनता का जनता के लिए जनता द्वारा यही ना है लोकतंत्र की परिभाषा? पर जनतंत्र नही दलतंत्र है जहां हमारे चुने हुए प्रतिनिधि चुम्बन लेकर हमें कब्र का रास्ता देते हैं।

इंटरनेट पर किया गया खर्च आपका होता है आटा से सस्ता डाटा इसलिये किया गया और मनोरंजन के लिए इतने सारे विकल्प दे दिए गए हैं कि आप हम बस उसमें उलझे रहें। शक्तिविहीन प्राणी बनाने की यह साजिश है। आर्टिफिशियल इंटलीजेंस का सहारा लिया जाएगा।

आर्टिफिशियल इंटलीजेंस के सहारे

एक उदहारण यह भी समझ लीजिए कल आप अपनी समस्या का समाधान करने के लिए कॉल सेंटर को फोन करते थे। पर वह सिस्टम खत्म है BPO को आर्टिफिशियल इंटलिजेंश ने कब का निगल लिया। अब आप चैट बोट का इस्तेमाल कर रहे हैं।

जैसे कि आपको किसी कम्पनी में शिकायत करनी हो या अपने समस्या का समाधान चाहते हैं तो चैट बोट पहले से ही हर समस्या के निदान करने को तैयार है। वहां कोई बन्दा बैठ कर आपके प्रश्न का उत्तर नही देता बल्कि यह आर्टिफिशियल इनयलिजेंश का ही कमाल है। इसलिये BPO कस्टमर केयर जैसी चीजें इतिहास के पन्नों में दफन हो गयी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) यानी कृत्रिम बुद्धिमता…यह ऐसी तकनीक है जो समझ सकती है कि इंसान कब, क्या चाहता है और उसे वही सुविधा देती है।

यह बदलाव कितना सार्थक होगा और इसके क्या दुष्परिणाम होंगे यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा। फिलहाल नजर बनी हुई है।

नोट : देश के कई संस्थान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोर्स भी चल रहे हैं। इसमें कुछ शार्ट टर्म और कुछ लॉन्ग टर्म कोर्सेज हैं। अगर आप उन कोर्सों के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो कमेंट करें Daily Hawker (डेली हॉकर) जरुर आपको बताएगा।

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