Digital Master Sahab: माट’साब

Digital Master Sahab: माट’साब

नवम्बर के आउटलुक विशेषांक में माटसा’ब कवर पेज आकर्षक इसलिये है क्योंकि पूंजीवाद की धार गुरु शिष्य की परंपरा को क्षत विक्षप्त कर दिया है। इस पोस्ट का शीर्षक Digital master sahab इसलिए दिया गया है की अब शिक्षक ने अपना स्थान बदल कर डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म अपना लिया है। एक पंत दो कार्य मतलब क्लास रूम में पढ़ाने के साथ वीडियो बना लो और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर चटकदार थम्ब्लिन लगा कर चेंप दो।

आमदनी का दो-दो जरिया तैयार! आज सब पूंजीवाद की गोद में लहालोट हैं। भूमंडलीकरण के इस दौर में सेलेब्रिटी गुरू घण्टाल छाये हुए है। इस पत्रिका का अंक डिजिटल ऑनलाइन शिक्षक को समर्पित है। हां वही डिजिटल आजादी जो पिछले आठ दस सालों से भारत में चाईनीज माल की तरह छापे हुए है। आजादी के बाद पहली बार गुरु जी भी सेलेब्रिटी बन रहे हैं। रील्स, शार्ट्स और यूट्यूब के जरिये लाखों व्यूज मिल रहे हैं और प्रसिद्धि के साथ मजे में कमा भी रहे हैं।

Digital Master Shahab का उद्दभव और प्रभाव

कई बार तो तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर मल भी परोस रहे हैं। गोबर होता तो ऑर्गेनिक ज्ञान भी बढ़ता! पर जब हाईब्रिड बनाने के लिये केमिकल का प्रयोग हो तो सतही स्तर पर चमचमाता चीज पर अंदर से सड़ा हुआ ही निकलता है। अब कंप्यूटर ज्ञान हो या रेलवे, आइएएस की परीक्षा गुरु आपके पॉकेट में वीरजमान हैं।

यह नया कारोबार अमीबा की तरह फल फूल रहा है। बायलॉजी पढ़ने वाले जानते होंगे कि अमीबा किस तरह खुद को गुणात्मक तरीके से बढ़ता है! बाजार में ऑनलाईन बाईजू, अनएकेडमी जैसे संस्थान जो बड़े बड़े यूनवर्सिटी को ठेंगा दिखा रहे हैं। उन सरकारी इंस्च्यूट के ऊपर गाल पर तमाचा ही है! ये सारे ऑनलाइन गुरुकुल पैकेजिंग पर मेहनत करते हैं।

उन्हें पता है कि मस्त पैकेजिंग के साथ सड़ा माल परोसो तो जीभ लपलपाते हुए लोग खिंचे चले आएंगे। बैजू और अनेकेडमी जैसे कई स्टार्टअप अपना अपना बाजार में हिस्सेदारी बना रहे हैं। दरअसल इंजीनियर से कलेक्टर तक बनने की राह इतनी आसान कभी नहीं थी। आज यंग जनरेशन के माइंड को पॉल्युट किया जा रहा है। अब गुरु जी न्यूज चैनल की तरह सेंसेनल हो गए हैं। अबकी बार मोदी सरकार के तर्ज पर “अबकी बार आईएस पार” जैसे यूट्यूब थंबलिन पर दिखने लगे हैं। अच्छे इतिहास का कोई जानकार इनके वीडियोज देख ले तो फांसी पर लटक जाए। अपने औसत ज्ञान को चाशनी के लबादे ओढ़ा कर इतिहास को परोस देते हैं।

स्तरहीनता की सारी हदें पार

गांधी, नेहरू कलाम तक का मजाक उड़ा कर और अहिंसा जैसे अस्त्र शस्त्र को निक्कमा बना कर सुभाष चन्द्र, आजाद को उनके मुकाबले खड़ा कर देते हैं और जम कर हमला करते हैं। स्टूडेंट के मन में विष भरना इनके चाल चलन और पढ़ाई के तरीकों में शामिल हो चला है। भद्दे मजाक स्टूडेंट को यूनिक तरीके से पढ़ाने की ललक स्तरहीनता के सारी हदें पार कर बैठते हैं।

इतिहास में जिनका कोई योगदान नही उन्हें फोकस में रख कर किसी भी लिंक से जोड़ कर दैवीय सम्मान दे देना इनके लिए चुटकी का काम होता है। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का सिलेबस आपके हमारे फोन में ऐसे ही नही आता। इसके पीछे डिजिटल गुरु का बड़ा हाथ होता है। रुपया आज के समय में गिरता जा रहा है पर डिजिटल गुरु अपने चैनल के माध्यम से बता देते हैं कि कैसे मोदी जी ने मास्टरस्ट्रोक डालकर “चीन को घेर” दिया है,और रूपया विश्व की करेंसी बनने की राह पर है।

स्टडी को स्पाइसी बनाना और विशेष प्रकार के मशाले में परोसना ताकि स्टूडेंट चटकारे लें मार्केटिंग के यही तो तरीके हैं! आज जितने भी देश में बड़े कोचिंग संस्था है शिक्षा के बिजनेश मैन की तरह इन ऑनलाइन गुरु भी किसी ना किसी दल से सांठ गांठ है। सत्ता से सम्बन्ध है और सत्ता के मन माफिक नरेटिव चला रहे हैं। अगर कहा जाए कि इस गढ़े गए नरेटिव से सावधान रहिये, मत सीखिए, सत्य का अन्वेषण कीजिए, तो भी गलत होगा। क्योंकि बाजारवाद आप पर हावी है आप व्हाट्सएप यूनवर्सिटी से ज्ञानी होते जा रहे हैं।

Digital Master Shahab आज की आईटम गर्ल की तरह

सनद रहे यह ज्ञान आपको नम्बर नही देने वाले बल्कि जीवन में मिले आपके घर परिवार से मिले संस्कार में से भी नम्बर कटने वाले हैं। आपके ज्ञान को शानदार तरीके से लीपा पोता जा रहा है। दर्शनशास्त्र और हिंदी के लिए वे अनन्य शिक्षक है, नो डाउट। जो तथ्यों और तर्कों का बेहद सफाई से इस्तेमाल करते हैं और उनका लेक्चर आपको बेहद आराम-आराम से छात्र को मौजूदा सरकार की लाइन के मुताबिक ढाल देता है। आपको ऐसा लॉजिक के साथ तर्क देंगे जैसा लगेगा यही सत्य है।

इससे आपको ऐसा महसूस होगा कि यह सफलता के लिए जरूरी भी है। आज के डिजिटल गुरु आईटम गर्ल की तरह कोई मल्लिका शेरावत तो कोई राखी सावंत है। पोस्टर में उन डिजिटल गुरू को जगह मिली है जो फेमस हैं। जिनके अनुयायी लाखों करोड़ों में हैं। राम रहीम, आशाराम की तर्ज पर। यह चर्चा खास है इसलिए है कि आउटलुक एक प्रतिष्ठित पत्रिका है।

यह आईटम गुरु कवर पेज पर थंबलिन की तरह हैं। ये लोग नए जमाने के माटसा’ब हैं। मुखपृष्ठ पर खान सर को भी जगह मिली है। उनकी चर्चा इसलिये जरूरी है कि इनके पढ़ाने का अंदाज कभी-कभी A सर्टिफिकेट जैसा रहता है कुछ भी बोल कर हंस कर आगे खसक जाते हैं। माना कि यंग हैं।

खून में उबाल है पर डिजिटल प्लेटफॉर्म का भरपूर प्रयोग भी करना है तो ऐसी ऐसी मर्यादा यहां सम्मान पा रही है। वह अब शिक्षक का अर्थ डिजिटल मात्र रह गया है। बच्चे अब इसी प्लेटफ़ॉर्म पर अपने-अपने गुरु खोज रहे हैं। जब मन चाहा अगुठे का इस्तेमाल कर गुरु चर्चा में शामिल हो जा रहे हैं। इसलिये यह चर्चा और आउटलुक का यह अंक उनके बगैर पूरा नही सकता है। क्योंकि वे गुरूमण्डल के राखी सावंत है। नए जमाने के धन्ना सेठ अडानी अम्बानी हैं। हॉट सेलिंग सेलेब्रिटी है, और सेलेब्रिटी गुरू छाये हुए हैं।

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