दुनिया बेहिजाब होना चाहती है भारत हिजाब चाहता है!

दुनिया बेहिजाब होना चाहती है भारत हिजाब चाहता है!

यूरोपियन पार्लियामेंट का मामला याद कीजिये जब इसी अक्टूबर महीने में हिजाब के विरोध में ईयू सांसद का चलती सदन में अपने बाल काट दिए। यह महिलाओं के समर्थन में था। बहरहाल यह मामला हिजाब रखने या ना रखने का नही है।

हिजाब रखना है, पगड़ी बांधना, शरीर पर धागा लपेटना, तिलक, सुर्ख़ी, बिंदी लगाना, ये सारे संस्कृति के मामले हैं, धर्मरीतों के मामले हैं। भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी संस्कृति और धर्मरीत मानने की आज़ादी देता है। फिर यह हिजाब मामला किसी शरारत से कम नही लगती। 

आखिर यह मामला आया कैसे? इस विवाद का राष्ट्रीय सूत्रधार आखिर कौन है! क्या देश में हिजाब, जनेऊ, बुल्डोजर जैसे ही मुद्दे रह गए हैं। कहा भी गया है कि किसी नस्ल को तबाह और बर्बाद करना है तो उसके आर्थिक और शैक्षणिक जड़ में तेजाब डाल दो। जो भी इसका सूत्रधार है उनलोगों से निबटे बैगर देश विश्व गुरु ना हो कर ‘विषगुरु’ बनता जाएगा और आज नही तो कल सबको भुगतना पड़ेगा।

आखिर हम जा कहां रहे हैं वर्तमान का निर्माण अगर खुबसुरत हो तो भविष्य भी खुबसुरत होता है। कल को अगर सिक्खों को भी केश, पगड़ी कृपाण से मना कर दिया जाए तो! हमारी आने वाली नस्ल को हम कैसा खाद पानी देने की कोशिश क्र रहे हैं।

हिजाब पहनने से जुड़ा ये मामला अक्टूबर 2021 से कर्नाटक से शुरू हुआ, जब एक पीयू कॉलेज की कुछ छात्राओं ने हिजाब पहनने की मांग शुरू की। फिर यह मामला यूपी होते हुए देश के विभिन्न राज्य में पहुंचा। अब यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी छाने लगा।

बहरहाल बात करते हैं हिजाब परम्परा की जो सालों से चलती आई है। दुनिया मॉर्डन होती गयी और कई परम्परा धाराशाही होते गए। हिजाब पहनना या ना पहनना के धार्मिक बहस में जाना ठीक नही क्योंकि यह पेचीदा हो सकता है। ठीक उसी तरह व्यक्तिगत भी हो सकता है।

कुछ दिन पहले बात यहां तक होने लगी कि न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया ने हिजाब का समर्थन करने वाले लोगों को अल कायदा से जोड़ने पर बहस करने के लिए News18 India की निंदा की। यहां तक कि चैनल पर  50,000 रुपये का जुर्माना तक लगाया गया।

एक तरफ हिजाब के खिलाफ क्रांति में दुनिया शामिल हो रही है वहीं कोई समर्थन भी कर रहा है। सवाल हिजाब पहनने न पहनने का नहीं। सवाल यह भी नहीं है कि ईरान की महिलाएं हिजाब पहनने के खिलाफ और भारत में मुस्लिम महिलाएं हिजाब पहनने का क्यों अधिकार चाहती हैं? सबसे बड़ा प्रश्न है आजादी का।

क्या किसी देश के नागरिक को यह आजादी नहीं होनी चाहिए कि वह क्या खाए और क्या पहने? यह तो लोगों का मूलभूत अधिकार है कि वह क्या खाए-पिए क्या पहने-ओढ़े? वहीं किसी देश को भी इस तरह का प्रतिबंध लगाने का कोई नैसर्गिक अधिकार नहीं है। इन पर प्रतिबंध या नियंत्रण करना उसी तरह है जैसे सांस लेने के लिए ऑक्सीजन छीन लेना।

इस मायने में अगर देखा जाए तो ईरान की स्त्रियों का हिजाब पहनने के खिलाफ जो आंदोलन चल रहा है वह जायज है और भारत की मुस्लिम महिलाओं का हिजाब पहनना भी जायज है। क्योंकि दोनों ही मूलतः मौलिक आजादी और अधिकार का मामला बनता है। सही बात तो यह है कि दोनों मामलों को एक ही नजरिये से नही देखा जा सकता है।

दोनों ही देशों की महिलाओं को पहनने या न पहनने की आज़ादी मिलनी चाहिए। हमें ध्यान देना होगा की हमारा अगर इस पृथ्वी पर जितना प्राकृतिक या नैसर्गिक अधिकार है तो क्या पहनाना क्या ओढ़ना भी हमारा नैसर्गिक अधिकार है।

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