मोरबी घटना: मातम के माहौल में बेशर्मी की हद!

मोरबी घटना: मातम के माहौल में बेशर्मी की हद!

मोरबी में जिस तरह इतनी बड़ी दुर्घटना हुई उसके बाद गुजरात भाजपा के बेशर्म स्वास्थ्य मंत्री ऋषिकेश पटेल मोरबी अस्पताल पहुँचने की बजाए अपने जन्मदिन की पार्टी में व्यस्त थें! एक तरफ़ मोरबी पुल दुर्घटना में मौत का कोहराम था मातम था दूसरी तरफ़ रात 11 बजे से गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री ऋषिकेश पटेल के जन्मदिन का जश्न था, पटाखे थे, फुझड़ियाँ थीं।

अस्पताल चकाचक दिखे इसके लिए अस्पताल का रंग रोगन

विपत्ति की घड़ी में भला कौन जश्न मनाता है। वहीं पीएम मोदी मोरबी अस्पताल आने वाले थे। अस्पताल चकाचक दिखे इसके लिए अस्पताल का रंग रोगन किया जा रहा था। पीएम ठहरे फोटोजीवी साथ में फोटोग्राफर मीडिया बन्धु थें। गुजरात मॉडल को पूरी दुनिया में दिखाना था इसलिए सब चकाचक होना चाहिए था।

मुन्ना भाई एमबीबीएस फ़िल्म की भांति जब फ़िल्म के हीरो को पता चलता है कि उसके पिता आने वाले हैं तो आनन फानन में एक वसूली भाई के अड्डे को चमचमाती अस्पताल में बदल दिया जाता है। उस फिल्म का दृश्य याद कीजिये और मोरबी अस्पताल के कायाकल्प को देखिए। दोनों में कोई अंतर नजर नही आएगा।

कोई मरे तो मरे, तस्वीर खराब नहीं होनी चाहिए। 200लोगों के मरने की खबर है। इससे ज्यादा घायल हैं। अस्पताल से परिजनों और घायलों को बाहर कर दिया गया था ताकि अस्पताल सजाया जा सके।

मोरबी प्रशासन हरकत में

मोरबी प्रशासन हरकत में थी। अस्पताल, सड़कें सब चमकाई जा रही हैं। मातम के माहौल में रात भर मरम्मत, रंग रोगन शुरू था। वैसे तो यह होना चाहिए कि थोड़ी सी शर्म बची हो तो गुजरात सरकार को मोरबी घटना के लिए खुद इस्तीफा देकर विधानसभा भंग कर देनी चाहिए। वहीं ठेकेदार से लेकर सभी दोषियों पर हत्या का मुकद्दमा दायर करना चाहिए। राजनीति नूरा कुश्ती की बात करें तो कुछ लोग इसे आतंकी घटना की साजिश बताने में लगे हैं।

घटना की तार अगर नेहरू गांधी परिवार से जोड़ दिया जाए तो बड़ी बात नही। राजनीति इतनी ओछी हो जाएगी कि मौत पर भी संवेदना की जगह अपनी-अपनी रोटी सेंकने में कोई कसर नही छोड़ेंगे। पीएम के मोरबी पहुंचने से पहले खबरें चलने लगी थीं कि मोरबी के जख्म पर “मोदी का मरहम” कई मीडिया चैनल अपने-अपने अलौकिक ज्ञान से इतनी मौत के बाद भी चापलूसी करने से नही चूक रहे थें चैनल वाले।

हादसे के दिन मोदी गुजरात में

हादसे के दिन मोदी गुजरात में थे लेकिन मोदी को महामानव बनाने में लगे चैनल मोदी से सवाल भला क्यों करें! सवाल होना चाहिए था कि मोदी को गुजरात में रहते हुए अस्पताल जाने में इतना वक्त क्यों लगा? यह सवाल कौन पूछेगा? गुजरात सरकार जो कह रही है उससे जमीनी हकीकत कितना है? जब पीएम मोदी अस्पताल पहुंचने वाले थे तो अस्पताल का कायाकल्प किया जा रहा था।

जबकि होना यह चाहिए था कि घायलों को राहत और बचाव के लिए अफरा तफरी होनी चाहिए थी। जिस गुजरात ने मोदी को सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाया आज भी कर्म पथ का बहाना लेकर सर पर हैट लगा कर चुनावी सभा को सम्बोधित कर रहे हैं।

एफआईआर हुई है पर क्या किसी मंत्री नेता या अधिकारी को नामजद किया गया! सवाल यह भी है कि अजंता नामक कम्पनी के ट्रस्ट को इस पुल की रखरखाव, संचालन मेंटेनेंस देने का जिम्मा किसने दिया! किसके आदेश पर और किसके हस्ताक्षर पर यह खेल हुआ! इसकी जवानदेही कौन देगा! चुनाव आ रहा है तो आनन फानन में रिबन काटने की जल्दबाजी में बिना फिटनेस सर्टिफिकेट पुल चालू क्यों किया गया!

ऐसे ऐसे सवाल भारत के हर व्यक्ति के जेहन में है। बहुत हद तक अब यह होने वाला है कि मोरबी से ध्यान भटकाया जाए। लेकिन समझ लीजिए आज इस मुद्दे को ढंक दिया गया तो आने वाले वक्त में हमारी नस्ल वही सवाल करेगी जो आज हमें सरकार से करनी चाहिए।

रुपया कमजोर नही बल्कि डॉलर मजबूत

प्रचार तंत्र से सरकार अपनी करतूतों को ढंक तो सकती है पर ऊपर वाले के लाठी में आवाज नही होती। याद कीजिये थोड़े दिन पहले वित्त मंत्री का बयान कि रुपया कमजोर नही हो रहा बल्कि डॉलर मजबूत हो रहा है। कल को अगर यह सुनने को मिले कि पुल कमजोर नही था बल्कि लोग मोटे थें जिस कारण ओवरलोड से पुल ढह गया।

ऐसे ऐसे हास्यपद बयान तो रोज आते रहते हैं। ना तो मुगलिया सल्तनत ने और ना ही ब्रिटानिया हकूमत ने भारतवर्ष को बर्बाद किया पर अब इस सबसे बड़े लोकतंत्र वाले देश में मीडिया सवाल करना छोड़ दे तो देश को बर्बाद होते वक्त नही लगेगा।

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